Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 02, 2018 लफ्जों के बोझ से थक जाती है जुबां कभी कभी, पता नही यह ख़ामोशी है मज़बूरी समझदारी Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments Mahtab Alam JalalpurOctober 28, 2018 at 6:44 AMना मै हुर का मुफ्तूं ना परी का आशिकखाक के पुतले का है खाक का पुतला आशिकReplyDeleteRepliesReplyAdd commentLoad more... Post a Comment
दोस्त हम वादे पर... April 15, 2018 नफरत को हम प्यार देते है, प्यार पे खुशियाँ वार देते है, बहुत सोच समझकर हमसे कोई वादा करना, ऐ दोस्त हम वादे पर ज़िन्दगी गुजार देते है। Read more
ना मै हुर का मुफ्तूं ना परी का आशिक
ReplyDeleteखाक के पुतले का है खाक का पुतला आशिक