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लफ्जों के बोझ से थक जाती है जुबां कभी कभी, पता नही यह ख़ामोशी है मज़बूरी समझदारी 

दोस्त हम वादे पर...

नफरत को हम प्यार देते है,  प्यार पे खुशियाँ वार देते है,  बहुत सोच समझकर हमसे कोई वादा करना,  ऐ दोस्त हम वादे पर ज़िन्दगी गुजार देते है।

yeh hai mera pahle blog